इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीति पर सहमति
अमेरिका और फिलीपींस ने अपनी ऐतिहासिक साझेदारी को एक बार फिर मजबूत करने का एलान किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका और फिलीपींस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मनीला में आयोजित 12वीं द्विपक्षीय सामरिक वार्ता के दौरान रक्षा, आर्थिक और समुद्री सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई।
1951 की रक्षा संधि पर फिर मुहर
दोनों देशों ने 1951 की पारस्परिक रक्षा संधि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया कि यह संधि प्रशांत क्षेत्र में किसी भी सशस्त्र हमले की स्थिति में दोनों देशों की सेनाओं, विमानों और सरकारी जहाजों यहां तक कि कोस्ट गार्ड पर भी लागू होगी। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच इस संधि का महत्व और बढ़ गया है। बयान में समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर जोर दिया गया।
दक्षिण चीन सागर पर चीन को संदेश
संयुक्त बयान में चीन की अवैध, आक्रामक और दबावपूर्ण गतिविधियों की आलोचना की गई और कहा गया कि इससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता प्रभावित हो रही है। दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक में मुक्त, खुला और सुरक्षित क्षेत्र बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही यह भी कहा गया कि प्रथम द्वीप श्रृंखला में सामूहिक रक्षा किसी भी आक्रामकता को रोकने के लिए जरूरी है।
सैन्य सहयोग और नई तैनाती
अमेरिका और फिलीपींस ने 2026 में पांचवीं टू प्लस टू मंत्री स्तरीय वार्ता आयोजित करने का फैसला किया है। दोनों पक्षों ने संयुक्त सैन्य क्षमता और आपसी तालमेल बढ़ाने, अत्याधुनिक मिसाइल और मानवरहित प्रणालियों की तैनाती बढ़ाने तथा साइबर सुरक्षा सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई। इसके अलावा जापान के साथ विदेश मंत्रियों स्तर की त्रिपक्षीय वार्ता भी प्रस्तावित है, जिससे क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन को नई दिशा मिल सकती है।
आर्थिक सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा
बैठक में आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बताया गया। दोनों देशों ने लूजोन इकोनॉमिक कॉरिडोर में निवेश बढ़ाने और 2026 में मनीला में पहला निवेश फोरम आयोजित करने की घोषणा की। परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी। साथ ही सुरक्षित और मानक-आधारित क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन विकसित करने का संकल्प लिया गया।
परमाणु और स्वास्थ्य सहयोग
नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिका ने 15 लाख डॉलर की सहायता की घोषणा की है, जिसके तहत फिलीपींस में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) कंट्रोल रूम सिम्युलेटर विकसित किया जाएगा। इसके अलावा अमेरिका ने फिलीपींस की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 250 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता भी दोहराई। संयुक्त बयान में ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता के महत्व को रेखांकित किया गया। साथ ही किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बल प्रयोग का विरोध किया गया।
भारत और इंडो-पैसिफिक के लिए क्या मायने?
अमेरिका-फिलीपींस गठबंधन में बढ़ती सक्रियता को भारत सहित अन्य इंडो-पैसिफिक साझेदार ध्यान से देख रहे हैं। समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन विविधीकरण और आसियान की भूमिका क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन के केंद्र में हैं। स्पष्ट है कि इंडो-पैसिफिक अब वैश्विक शक्ति संतुलन का अहम मंच बन चुका है, जहां अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ रक्षा और आर्थिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने में जुटा है।


राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (18 फ़रवरी 2026)
योग से सशक्त होगा युवा वर्ग, शिक्षा के साथ स्वास्थ्य भी आवश्यक :रूपनारायण सिन्हा
सरगुजा जिले में पीएम आवास निर्माण ने पकड़ी रफ्तार
छत्तीसगढ़: नक्सल छाया से पर्यटन हब तक की शानदार यात्रा
श्रमिक जन संवाद/श्रमिक सम्मेलन का हुआ आयोजन